भाव, पहचान और संवाद की भाषा : हिंदी

World Hindi Day

हिंदी केवल एक भाषा नहींबल्कि भारत की आत्मासंस्कृति और सामूहिक चेतना की सजीव अभिव्यक्ति है। यह करोड़ों लोगों के हृदय की भाषा हैजिसमें वे सोचते हैंसपने देखते हैं और अपने भावों को सहजता से अभिव्यक्त करते हैं। हिंदी ने सदियों से भारतीय समाज को जोड़ने का कार्य किया है और समय के साथ वह राष्ट्रीय सीमाओं से बाहर निकलकर एक वैश्विक भाषा के रूप में प्रतिष्ठित हुई है। हिंदी की इसी अंतरराष्ट्रीय महत्ता को रेखांकित करने के लिए प्रतिवर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1975 में नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन की स्मृति से जुड़ा हैजिसमें विश्व के अनेक देशों के विद्वानों और प्रतिनिधियों ने भाग लेकर हिंदी को वैश्विक मंच प्रदान किया। विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य हिंदी के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देनाउसके प्रयोग को प्रोत्साहित करना तथा विश्व मंचों पर हिंदी की सशक्त उपस्थिति सुनिश्चित करना है। इस अवसर पर देश-विदेश में संगोष्ठियाँकवि सम्मेलनभाषणनिबंध प्रतियोगिताएँ और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैंजो हिंदी के प्रति नई पीढ़ी में चेतना और सम्मान का भाव उत्पन्न करते हैं। 

हिंदी भाषा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि अत्यंत समृद्ध रही है। इसका विकास संस्कृत से प्राकृतअपभ्रंश और अंततः आधुनिक हिंदी के रूप में हुआ। अवधीब्रजभोजपुरीमगहीमैथिली और खड़ी बोली जैसी उपभाषाओं ने हिंदी को जनभाषा का स्वरूप प्रदान किया। कबीरतुलसीदाससूरदास और रहीम जैसे भक्त कवियों ने हिंदी को लोकजीवन से जोड़ावहीं भारतेंदु हरिश्चंद्रप्रेमचंदनिराला और महादेवी वर्मा जैसे साहित्यकारों ने इसे आधुनिक संवेदना और सामाजिक यथार्थ की भाषा बनाया। हिंदी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समावेशी प्रवृत्ति है। इसने अरबीफ़ारसी और अंग्रेज़ी जैसी भाषाओं के शब्दों को आत्मसात करते हुए भी अपनी मौलिक पहचान बनाए रखी। इसी लचीलेपन और ग्रहणशीलता के कारण हिंदी संवाद की सरलप्रभावी और व्यापक भाषा के रूप में विकसित हुई। 

हिंदी आपके लिए क्या है?

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भाव
पहचान
संवाद
संस्कृति

भारतीय संविधान में हिंदी को विशेष स्थान प्रदान किया गया है। संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित किया गया हैजबकि अनुच्छेद 351 संघ को यह दायित्व सौंपता है कि वह हिंदी का विकास इस प्रकार करे कि वह भारत की विविध भाषाओं की अभिव्यक्तियों को समाहित कर सके और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ बनाए। इसके अतिरिक्त संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को मान्यता दी गई हैजो भारत की भाषाई विविधता और सह-अस्तित्व की भावना को दर्शाती है। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा नहींबल्कि राजभाषा है। संविधान निर्माताओं ने बहुभाषी भारत की संवेदनशीलता को समझते हुए हिंदी को प्रशासनिक भाषा का स्थान दिया और अन्य भारतीय भाषाओं के अधिकारों को भी सुरक्षित रखा। 

राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी का प्रयोग प्रशासनशिक्षा और जनसंचार के माध्यमों में निरंतर विस्तार पा रहा है। केंद्र सरकार के मंत्रालयोंसार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी कार्यालयों में हिंदी का व्यापक प्रयोग किया जा रहा है। राजभाषा अधिनियम, 1963 और उससे जुड़े नियमों ने हिंदी के प्रयोग को संस्थागत आधार प्रदान किया है। शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) ने मातृभाषा और स्थानीय भाषा में प्रारंभिक शिक्षा पर विशेष बल दिया है। हिंदी माध्यम में उच्च शिक्षाप्रतियोगी परीक्षाओं में हिंदी का विकल्प तथा तकनीकी शब्दावली का विकासये सभी प्रयास हिंदी को ज्ञान-विज्ञान की भाषा बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। मीडियासिनेमा और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ने हिंदी को अभूतपूर्व विस्तार दिया है। समाचार पत्रटीवी चैनलरेडियोफिल्मेंओटीटी प्लेटफ़ॉर्मसोशल मीडियाब्लॉग और यूट्यूब ने हिंदी को विशेषकर युवाओं की सशक्त अभिव्यक्ति का माध्यम बना दिया है। 

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी की उपस्थिति निरंतर सुदृढ़ होती जा रही है। आज हिंदी विश्व की प्रमुख भाषाओं में गिनी जाती है। फिजीमॉरीशससूरीनामत्रिनिदाद-टोबैगो और नेपाल जैसे देशों में हिंदी का व्यापक प्रयोग होता है। संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने की माँग लंबे समय से की जा रही है। विदेशों में बसे प्रवासी भारतीयों ने हिंदी को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर विश्व के अनेक देशों में भारतीय दूतावासों द्वारा आयोजित कार्यक्रम यह सिद्ध करते हैं कि हिंदी अंतरराष्ट्रीय संवाद की प्रभावी भाषा बन रही है। अमेरिकारूसजर्मनीजापान और चीन जैसे देशों के विश्वविद्यालयों में हिंदी का अध्ययन और शोध हो रहा हैजिससे विदेशी विद्यार्थी भारतीय संस्कृतिदर्शन और समाज को गहराई से समझ पा रहे हैं। 

अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य के क्षेत्र में सूरीनाम और मॉरीशस का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है। सूरीनाम में हिंदी साहित्य का विकास भारतीय गिरमिटिया मजदूरों के साथ प्रारंभ हुआजिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी भाषा और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखा। सूरीनामी हिंदी साहित्य में प्रवासी जीवन की पीड़ास्मृतियाँसंघर्ष और पहचान की तलाश प्रमुख विषय रहे हैं। श्रीनिवासकिशुनदेव सिंहरामदेव बक्सीमुनशी रहमान ख़ान और हरिशंकर प्रसाद जैसे लेखक सूरीनामी हिंदी साहित्य के प्रमुख स्तंभ हैंजिनकी रचनाओं में भारतीय संवेदना और प्रवासी अनुभवों का सशक्त चित्रण मिलता है। 

इसी प्रकार मॉरीशस हिंदी भाषा और साहित्य का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय केंद्र रहा है। वहाँ हिंदी को शैक्षिक और सांस्कृतिक संरक्षण प्राप्त है तथा विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में हिंदी का अध्ययन कराया जाता है। मॉरीशस के प्रमुख हिंदी साहित्यकारों में अभिमन्यु अनंतसोमनाथ गुंडेचारामदेव धुरंधर और बसंत कुमार जैसे नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। अभिमन्यु अनंत के उपन्यासों और कविताओं में प्रवासी भारतीय समाज का संघर्षआत्मसम्मान और सांस्कृतिक चेतना अत्यंत प्रभावशाली रूप में अभिव्यक्त हुई है। मॉरीशस और सूरीनाम का हिंदी साहित्य यह प्रमाणित करता है कि हिंदी केवल भारत की भाषा नहींबल्कि वैश्विक अनुभव और मानवीय संवेदना की भाषा बन चुकी है। 

हिंदी का भविष्य अपार संभावनाओं से भरा हुआ हैयद्यपि इसके समक्ष कुछ चुनौतियाँ भी हैं। डिजिटल क्रांति ने हिंदी को वैश्विक मंच प्रदान किया है और इंटरनेट व मोबाइल के माध्यम से इसकी पहुँच तेजी से बढ़ी है। युवा वर्ग कंटेंट क्रिएशनस्टार्टअप संस्कृति और सोशल मीडिया के माध्यम से हिंदी को नई दिशा दे रहा है। वहीं उच्च शिक्षाविज्ञान-तकनीक और रोजगार के क्षेत्र में अंग्रेज़ी का वर्चस्व हिंदी के लिए चुनौती बना हुआ है। भाषा की शुद्धता और सहज प्रयोग के बीच संतुलन बनाए रखना तथा तकनीकी क्षेत्रों के लिए मानकीकृत हिंदी शब्दावली का विकास करना समय की आवश्यकता है। इसके लिए अनुवाद कार्यतकनीकी संसाधनों और सुदृढ़ भाषा नीति पर निरंतर निवेश आवश्यक है। बहुभाषिक भारत में हिंदी का विकास सहयोगसह-अस्तित्व और समन्वय की भावना के साथ होना चाहिए। 

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि हिंदी की यात्रा संघर्षसमन्वय और सृजन की प्रेरणादायक कहानी है। यह भाषा अतीत की विरासतवर्तमान की आवश्यकता और भविष्य की संभावनाओं को जोड़ने वाली एक सशक्त सेतु है। विश्व हिंदी दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि हिंदी अब केवल भारत की भाषा नहींबल्कि विश्व की भाषा बन चुकी है। यह दिवस हमें संकल्प लेने की प्रेरणा देता है कि हम हिंदी को भावनात्मक ही नहींबल्कि व्यावहारिकवैज्ञानिक और वैश्विक भाषा के रूप में विकसित करें। वास्तव मेंहिंदी तभी सशक्त होगी जब वह शिक्षाप्रशासनतकनीक और अंतरराष्ट्रीय संवाद के प्रत्येक क्षेत्र में आत्मविश्वास के साथ प्रयुक्त होगी। हिंदी है तो हम हैं और हिंदी का भविष्य हमारे सामूहिक प्रयासों में निहित है। 

विश्व हिंदी दिवस से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. हिंदी दिवस और विश्व हिंदी दिवस में क्या अंतर है?

हिंदी दिवस 14 सितंबर को भारत में मनाया जाता है, जबकि विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है। विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य हिंदी को वैश्विक मंच पर बढ़ावा देना है।

विश्व हिंदी दिवस 1975 में नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिंदी सम्मेलन की स्मृति में मनाया जाता है। इसका लक्ष्य हिंदी के अंतरराष्ट्रीय प्रचार और उपयोग को बढ़ाना है।

नहीं, हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा नहीं है। यह भारत की राजभाषा है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 343 के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है।

हिंदी का विकास संस्कृत से प्राकृत, अपभ्रंश और फिर आधुनिक हिंदी के रूप में हुआ। इसमें अवधी, ब्रज और खड़ी बोली जैसी उपभाषाओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 में हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित किया गया है। अनुच्छेद 351 हिंदी के विकास और विस्तार की जिम्मेदारी संघ को देता है।

हिंदी सीखने से भारतीय संस्कृति, साहित्य और समाज को बेहतर समझा जा सकता है। यह रोज़गार और संवाद दोनों के अवसर बढ़ाती है।

प्रवासी भारतीयों, वैश्विक शिक्षा संस्थानों और डिजिटल मीडिया के कारण हिंदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हुई। आज कई देशों में हिंदी पढ़ाई और बोली जाती है।

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This Post Has One Comment

  1. ZARINA Sadik Musa

    Hindi is One of the best language and its give us more responsibility and respect also.it is one of the well-known language in world

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